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सोडा फैक्ट्री या युद्ध का मैदान? शीतल पेय उत्पादन के पीछे के खतरनाक सच

Aerated Water Processing Safety

प्रस्तावना: एक साधारण बोतल का ‘विस्फोटक’ पहलू

क्या आपने कभी सोचा है कि जिस ठंडी सॉफ्ट ड्रिंक की बोतल को आप बड़ी आसानी से खोलते हैं, वह अपने निर्माण के दौरान एक खतरनाक मिसाइल का रूप ले सकती है? एक औसत एयरेटेड वाटर (Aerated Water) की बोतल के भीतर 30 से 60 PSI (पॉउंड प्रति वर्ग इंच) तक का दबाव होता है—यह लगभग एक कार के टायर के दबाव से दोगुना है। जब यह दबाव कांच की नाजुकता से मिलता है, तो एक छोटी सी दरार भी पूरी बोतल को ‘छर्रों’ (shrapnel) में बदल सकती है।

यही कारण है कि छत्तीसगढ़ फैक्ट्री नियम-141 (CG Factory Rule-141) के तहत एयरेटेड वाटर के निर्माण और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं को स्पष्ट रूप से “खतरनाक ऑपरेशन” (Dangerous Operation) की श्रेणी में रखा गया है। एक औद्योगिक सुरक्षा विशेषज्ञ के रूप में, मैं आपको उन कड़े कानूनी प्रावधानों के बारे में बताऊंगा जो इन कांच के टुकड़ों को जानलेवा बनने से रोकते हैं।

बिंदु #1: उड़ते हुए कांच के टुकड़ों से बचाव – मशीनों की घेराबंदी (Fencing of Machines)

सुरक्षा की पहली पंक्ति ‘प्राइमरी कंटेनमेंट’ यानी मशीन की बनावट है। नियम 1 के अनुसार, बोतलों या साइफन (Siphons) को भरने वाली सभी मशीनों का निर्माण, स्थान और उनकी घेराबंदी (Fencing) ऐसी होनी चाहिए कि यदि प्रक्रिया के दौरान कोई बोतल फटे, तो उसके टुकड़े वहां कार्यरत किसी भी व्यक्ति को न लगें।

यह केवल एक जाली लगाना नहीं है; यह एक इंजीनियरिंग अनिवार्यता है। मशीनों को इस तरह से ‘फेंस’ किया जाना चाहिए कि विस्फोट की स्थिति में कांच के टुकड़े मशीन के दायरे से बाहर न जा सकें।

बिंदु #2: चेहरे और गर्दन के लिए ‘कवच’ – फेस-गार्ड्स का महत्व

जब प्राथमिक घेराबंदी विफल हो जाए, तब व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) काम आते हैं। नियम 2(1) के तहत यह नियोक्ता (Occupier) की कानूनी जिम्मेदारी है कि वह न केवल ये उपकरण प्रदान करे, बल्कि उन्हें ‘अच्छी स्थिति’ में भी रखे।

विशेष रूप से फेस-गार्ड्स का प्रावधान केवल आंखों के लिए नहीं, बल्कि चेहरे, गर्दन और गले (face, neck, and throat) के लिए किया गया है। एक सुरक्षा विशेषज्ञ के रूप में मैं आपको बता दूं कि गले की सुरक्षा इतनी महत्वपूर्ण क्यों है: गर्दन की ‘जुगुलर वेन’ (Jugular vein) पर लगा कांच का एक छोटा सा टुकड़ा भी कुछ ही मिनटों में जानलेवा साबित हो सकता है।

स्रोत के अनुसार मुख्य नियम इस प्रकार है:

“नियोक्ता बोतलों को भरने में लगे सभी व्यक्तियों के उपयोग के लिए चेहरे, गर्दन और गले की सुरक्षा के लिए उपयुक्त फेस-गार्ड प्रदान करेगा और उन्हें अच्छी स्थिति में बनाए रखेगा।”

बिंदु #3: हाथों की सुरक्षा – गॉंटलेट्स (Gauntlets) की तकनीकी बारीकियां

हाथों की सुरक्षा के लिए ‘गॉंटलेट्स’ (मजबूत दस्ताने) के नियम बहुत विस्तृत हैं। नियम 2(2) उन सभी कार्यों की सूची देता है जहाँ चोट का जोखिम सर्वाधिक है: कोरिंग (corking), क्राउनिंग (crowning), स्क्रूइंग (screwing), तार लगाना (wiring), फॉइलिंग (foiling), कैप्सूलिंग (capsulin), बोतलों की सफ़ाई का निरीक्षण (sighting) और लेबलिंग (labelling)

इन प्रक्रियाओं के दौरान गॉंटलेट्स की बनावट ऐसी होनी चाहिए जो:

  1. पूरी बांह (Arm) को कवर करे।
  2. हथेली के कम से कम आधे हिस्से को ढके।
  3. सबसे महत्वपूर्ण: अंगूठे और तर्जनी (forefinger) के बीच के खाली स्थान (web space) को पूरी तरह सुरक्षित करे।

यही वह हिस्सा है जो बॉटलिंग के दौरान कांच के फटने पर सबसे पहले संपर्क में आता है।

बिंदु #4: सुरक्षा एक दोहरी जिम्मेदारी (Rule 3)

अक्सर लोग सोचते हैं कि सुरक्षा केवल कंपनी की जिम्मेदारी है, लेकिन नियम 3 इसे “टू-वे स्ट्रीट” बनाता है। यह स्पष्ट रूप से आदेश देता है कि ऊपर बताई गई प्रक्रियाओं में लगे प्रत्येक श्रमिक के लिए यह अनिवार्य है कि वे काम के दौरान प्रदान किए गए फेस-गार्ड और गॉंटलेट्स को पहनें। सुरक्षा उपकरणों का उपयोग न करना न केवल जोखिम भरा है, बल्कि कानूनी उल्लंघन भी है।

बिंदु #5: स्वचालन (Automation) – कब मिलती है नियमों में छूट?

आधुनिक तकनीक जोखिम कम करती है, और कानून इसे पहचानता है। नियम 141 में दो विशेष छूट (Proviso) दी गई हैं:

  1. यदि बोतलें एक ऐसी स्वचालित मशीन (Automatic Machine) द्वारा भरी जा रही हैं जो इस तरह बनी है कि फटने वाली बोतल का कोई भी टुकड़ा बाहर नहीं निकल सकता (Containment vessel design), तो व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों की अनिवार्यता में ढील दी जा सकती है।
  2. यदि मशीन की बनावट ऐसी है कि काम करते समय श्रमिक का केवल एक ही हाथ जोखिम में है, तो दूसरे हाथ के लिए गॉंटलेट पहनना जरूरी नहीं है।

बिंदु #6: मेडिकल ओवरसाइट – प्रमाणित सर्जन और फिटनेस प्रमाणपत्र

औद्योगिक सुरक्षा केवल उपकरणों तक सीमित नहीं है। नियम 141(e) और ‘शेड्यूल I’ के तहत, इन खतरनाक कार्यों में लगे श्रमिकों का स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य है। ‘प्रमाणित सर्जन’ (Certifying Surgeon) को प्रत्येक श्रमिक की जांच करनी होती है और ‘Form 32’ में फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करना होता है। यह एक बार की प्रक्रिया नहीं, बल्कि निरंतर चिकित्सा निगरानी (Medical Oversight) का हिस्सा है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि श्रमिक का स्वास्थ्य उस विशिष्ट कार्य वातावरण के अनुकूल है।

निष्कर्ष: सुरक्षा की कीमत और भविष्य की सोच

शीतल पेय उत्पादन की प्रक्रिया जितनी सरल दिखती है, उसके पीछे ‘छत्तीसगढ़ फैक्ट्री नियम-141’ की उतनी ही गहरी और तकनीकी सुरक्षा परतें मौजूद हैं। मशीनों की घेराबंदी से लेकर गले की सुरक्षा और ‘निरीक्षण’ (sighting) के दौरान पहने जाने वाले गॉंटलेट्स तक, हर प्रावधान का एक ही लक्ष्य है—शून्य दुर्घटना।

अगली बार जब आप सोडा या सॉफ्ट ड्रिंक की बोतल उठाएं, तो एक पल के लिए रुकें और सोचें: “क्या हम कभी उन कानूनी सुरक्षा कवचों और सावधानियों के बारे में सोचते हैं जो एक साधारण पेय के पीछे काम करने वाले हाथों को सुरक्षित रखती हैं?” कार्यस्थल पर सुरक्षा नियमों का पालन केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि जीवन की रक्षा का संकल्प है।

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